
अमेरिकी दवा आपूर्ति को चीन से गंभीर ख़तरा है, क्योंकि चीन का उसके संचालन पर नियंत्रण बढ़ रहा है।
एक-चौथाई जेनेरिक दवाएँ चीनी सामग्री से बनी हैं। इस निर्भरता के कारण सेवा में कमी हो सकती है और स्वास्थ्य सेवा पर प्रभाव पड़ सकता है। चीन नवीन औषधि विकास में भी अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, साथ ही वह इस प्रासंगिकता को कम करने तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के तरीके भी तलाश रहा है।
अमेरिका के एक कांग्रेगेशनल कमीशन ने अमेरिका की दवा आपूर्ति पर चीन के बढ़ते प्रभुत्व के बारे में खतरे की घंटी बजाते हुए कहा है कि वह देश के स्वास्थ्य को एक प्रतिकूल अनाज राष्ट्र के हाथों में सौंप रहा है।
अमेरिकी आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग द्वारा मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकियों द्वारा ली जाने वाली लगभग एक-चौथाई जेनेरिक दवाएं चीन से आयातित सामग्री पर निर्भर करती हैं। अमेरिकियों द्वारा उपयोग की जाने वाली दवाओं में 90% दवाएं प्रायः कम लागत वाली होती हैं। रक्त पतला करने वाली दवाओं, एंटीबायोटिक दवाओं और कैंसर के उपचार में पाए जाने वाले अधिकांश तत्व केवल चीन में उत्पादित होते हैं।
चीन द्वारा हाल ही में दुर्लभ मृदा खनिजों पर लगाए गए प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने कहा कि औषधि घटकों के संबंध में इसी प्रकार के कदमों के अमेरिकी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिससे आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होगी, जिसके परिणामस्वरूप जीवन की हानि होगी और अस्पतालों को अपर्याप्त आपूर्ति आवंटित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कांग्रेस ने 2000 में इस आयोग का गठन किया था, जिसका उद्देश्य संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच संबंधों के राष्ट्रीय सुरक्षा निहितार्थों पर नज़र रखना था, क्योंकि समूह के कर्मचारी महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला पर शोध करते हैं। सबसे चौंकाने वाले निष्कर्षों में से एक यह था कि अमेरिकी चिकित्सा को उजागर करने में चीन की भूमिका पूरी तरह से उजागर हो गई। आयोग के सदस्य लैंड मिलर, ट्रेक्स नामक एक डेटा कंपनी, चाइना बीच के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं।
स्मार्ट नीतियाँ बनाने की बात तो छोड़ ही दीजिए। उन्होंने यह नहीं समझा कि एक क्षमता कितनी बड़ी है, और उन्होंने यह भी नहीं समझा कि भेद्यता कितनी बड़ी है क्योंकि वे डेटा प्राप्त करने में असमर्थ हैं। सरकार के पास डेटा एकत्र करने का अधिकार नहीं है।
चीन की पहुँच के बारे में सरकार की ज़्यादातर समझ एक अनुमान पर आधारित है क्योंकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) दवाओं के मूल निर्माण-खंडों के बारे में आँकड़े एकत्र नहीं करता। समूह कांग्रेस से आवश्यक कानून तैयार करने की सिफ़ारिश कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, जेनेरिक दवाओं पर नियंत्रण की आलोचना के बावजूद, चीन अधिक आकर्षक उपचारों के उत्पादन में उस सफलता को दोहराने के लिए काम कर रहा है। आर्थिक प्रोत्साहन और अधिक नियमितता परिदृश्य ने चीन को दुनिया भर में सस्ते, तेज और प्रारंभिक चरण के अन्वेषण के लिए महत्वपूर्ण विकास साझेदार बना दिया है।
अमेरिकी दवा कैबिनेट पर चीन की पकड़ और उसका बढ़ता प्रभाव विश्व के सबसे बड़े आर्थिक और तकनीकी शक्तियों में से एक के रूप में अमेरिका का स्वास्थ्य और दवा क्षेत्र हमेशा से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मगर हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि अमेरिकी दवा कैबिनेट पर चीन की पकड़ धीरे-धीरे मजबूत होती जा रही है। यह स्थिति न केवल अमेरिकी स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण है, बल्कि वैश्विक दवा बाजार और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर परिणाम ला सकती है।
चीन की बढ़ती भूमिका अमेरिकी दवा उद्योग मेंचीन विश्व की दवा निर्माण और कच्चे माल की सप्लाई में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। कई अमेरिकी दवा कंपनियां अपने उत्पादन और कच्चे माल की खरीद के लिए चीन पर निर्भर हैं। इससे चीन को अमेरिकी दवा आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण स्थान मिला है। इसके अलावा, चीन की दवा कंपनियां और बायोटेक फर्में भी अमेरिकी बाजार में तेजी से प्रवेश कर रही हैं, जिससे उनकी पकड़ और भी मजबूत हो रही है।
आपूर्ति श्रृंखला पर चीन का प्रभाव अमेरिका की दवा कैबिनेट में चीन की पकड़ का एक बड़ा कारण है अमेरिकी दवा आपूर्ति श्रृंखला में चीन की निर्भरता। चीन न केवल सक्रिय दवा घटक (Active Pharmaceutical Ingredients – API) का सबसे बड़ा निर्माता है, बल्कि कई बार अमेरिकी दवा कंपनियां चीन से ही फार्मास्यूटिकल्स के लिए आवश्यक नवीनतम तकनीक और उपकरण भी प्राप्त करती हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान यह निर्भरता और अधिक स्पष्ट हुई, जब वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण अमेरिकी दवा उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
रणनीतिक और सुरक्षा चिंताएं चीन की बढ़ती पकड़ के कारण अमेरिका को न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक चिंताएं भी सताने लगी हैं। दवा और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में चीन का प्रभुत्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, खासकर तब जब दवाओं की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो या चीन द्वारा दवा उत्पादन में गुणवत्ता के मुद्दे सामने आएं। इसके अलावा, चीन द्वारा अमेरिकी दवा कंपनियों में निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाना भी अमेरिका के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह तकनीकी और बौद्धिक संपदा की चोरी के जोखिम को बढ़ा सकता है।अमेरिका की प्रतिक्रिया और नीतिगत कदम अमेरिका सरकार ने चीन की बढ़ती पकड़ के मद्देनजर कई नीतिगत कदम उठाए हैं। इनमें अमेरिकी दवा कैबिनेट की आपूर्ति श्रृंखला को विविधीकृत करना, घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना, और विदेशी निवेश पर कड़ी निगरानी रखना शामिल है। अमेरिका ने चीन से दवा कच्चे माल की निर्भरता कम करने के लिए भारत और अन्य देशों के साथ सहयोग भी बढ़ाया है। इसके साथ ही, अमेरिकी कांग्रेस में दवा सुरक्षा कानूनों को सख्त करने और घरेलू दवा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कई प्रस्ताव पारित किए गए हैं।
भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएंहालांकि अमेरिका ने चीन की पकड़ को कम करने के लिए कई प्रयास शुरू कर दिए हैं, फिर भी यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है। चीन की दवा उत्पादन क्षमता, कम लागत, और तकनीकी प्रगति इसे वैश्विक फार्मास्यूटिकल उद्योग में एक मजबूत खिलाड़ी बनाती हैं।
अमेरिका के लिए यह जरूरी होगा कि वह न केवल आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करे, बल्कि घरेलू दवा उद्योग को भी प्रतिस्पर्धी बनाए रखे।निष्कर्षअमेरिकी दवा कैबिनेट पर चीन की पकड़ एक गंभीर विषय है जो वैश्विक स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता, और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। चीन की बढ़ती भूमिका ने अमेरिका को अपनी दवा आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठित करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया है। आने वाले वर्षों में यह देखना होगा कि अमेरिका कैसे इस चुनौती का सामना करता है और किस प्रकार से वह एक सुरक्षित, स्वायत्त और मजबूत दवा प्रणाली का निर्माण करता है।यह विषय न केवल अमेरिकी सरकार के लिए बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दवा सुरक्षा और उपलब्धता पूरी दुनिया के लिए जीवन रक्षक होती है।
