
Delhi Attack श्रीनगर के एसएसपी संदीप चक्रवर्ती ने एक सामान्य सी दिखने वाली घटना की गंभीरता को समझा और डॉक्टर टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ।
देश सोमवार को दिल्ली में हुए बम धमाके से सन्न रह गया, लेकिन इससे पहले हरियाणा और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने एक बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया. करीब 3000 किलोग्राम विस्फोटक और कई अत्याधुनिक हथियार जब्त किए गए. इस ऑपरेशन के पीछे जिस अधिकारी की रणनीति और साहस ने देश को संभावित बड़े जनसंहार से बचाया वह हैं आईपीएस डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती. अक्टूबर में श्रीनगर के नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टर लगे मिले. अधिकांश लोगों के लिए यह मामूली घटना थी, लेकिन श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संदीप चक्रवर्ती ने इसे गंभीर खतरे का संकेत माना. उन्होंने तत्काल जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल में तीन संदिग्धों की गतिविधियां मिलीं. ये तीनों पहले पत्थरबाज रहे थे. पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क कश्मीर से लेकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था.
फरीदाबाद में डॉक्टरों का टेरर मॉड्यूल
संदीप चक्रवर्ती की लीडरशिप में शुरू हुई जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फरीदाबाद में डॉक्टर के रूप में कार्यरत तीन कश्मीरी युवक (डॉ. शाहीन सईद, डॉ. मुज़म्मिल गनई और डॉ. आदिल राथर) आतंकी संगठन से जुड़े थे. छापेमारी में उनके ठिकानों से 2,921 किलो विस्फोटक और एके सीरीज़ की राइफलें बरामद की गईं. जांच में पता चला कि वे पाकिस्तान स्थित आतंकियों के संपर्क में थे और भारत में कई राज्यों में हमले की साजिश रच रहे थे.

एक डॉक्टर से बने आईपीएस अधिकारी आंध्र प्रदेश के कुरनूल निवासी डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती ने साल 2010 में कुरनूल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और एक वर्ष तक डॉक्टर के रूप में कार्य किया. लेकिन उनका झुकाव जनसेवा की ओर था. साल 2014 में उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा जॉइन की. मेडिकल पृष्ठभूमि से आने के कारण उन्होंने पुलिसिंग में मानवीय दृष्टिकोण और वैज्ञानिक सटीकता का समावेश किया. जम्मू-कश्मीर में उन्होंने उरी, सोपोर, बारामूला, हंदवाड़ा, कुपवाड़ा, अनंतनाग और श्रीनगर जैसे संवेदनशील जिलों में सेवा दी. अप्रैल 2025 में श्रीनगर के एसएसपी का कार्यभार संभालते ही उन्होंने दो लक्ष्य तय किए थे – आतंकवाद पर काबू और नागरिकों का विश्वास हासिल करना.
‘ऑपरेशन स्पेशलिस्ट’ के रूप में पहचानसंदीप चक्रवर्ती के सहयोगी उन्हें ऑपरेशन स्पेशलिस्ट बताते हैं. वे तकनीक, विश्लेषण और मानवीय दृष्टिकोण का अद्भुत मेल रखते हैं. नौगाम पोस्टर केस में भी उन्होंने स्वयं नेतृत्व किया, जिसमें मल्टी-स्टेट आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ. यह जांच आधुनिक पुलिस तकनीक, डिजिटल साक्ष्य और राज्यों के बीच समन्वय की मिसाल बनी. डॉ. चक्रवर्ती को अब तक राष्ट्रपति वीरता पदक छह बार, जम्मू-कश्मीर पुलिस वीरता पदक चार बार और भारतीय सेना प्रमुख का प्रशस्ति पत्र मिल चुका है. यह उनके साहस और समर्पण की गवाही है
