
उनके रास्ते आपस में तो नहीं मिले, लेकिन 1961 में संयुक्त राष्ट्र के पहले महासचिव यू थांट और 1947 में चीन में भारत के पहले राजदूत के.एम. पणिक्कर, दोनों ही अंतर्राष्ट्रीयतावादी थे।
इतिहास में उनकी भूमिकाओं को ज़्यादातर छिपाया गया है, और दो जीवनियाँ इस कमी को पूरा करने की कोशिश करती हैं।
यू थांट: एक वैश्विक शांति के संरक्षकयू थांट, म्यांमार (तब के बर्मा) के एक शिक्षित और दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने 1961 से 1971 तक संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के पद पर कार्य किया। वे शीत युद्ध के तनावपूर्ण दौर में विश्व शांति बनाए रखने के लिए समर्पित थे। उनकी नीतियों में निरंतरता, तटस्थता और संघर्ष समाधान के लिए कूटनीति को प्राथमिकता दी गई।
यू थांट ने क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और अनेक वैश्विक विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में मदद की। वे संयुक्त राष्ट्र की संस्था को एक विश्व संगठन के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध थे, जहां सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित हो।
के.एम. पणिक्कर: भारत के चीन में पहले राजदूत और अंतर्राष्ट्रीयतावादी सोच के प्रवर्तकके.एम. पणिक्कर, एक शिक्षाविद्, राजनयिक और विचारक थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद चीन में भारत के पहले राजदूत के रूप में कार्य किया। उनकी भूमिका केवल राजनयिक स्तर तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने और एशिया में एकता की भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका दृष्टिकोण अंतर्राष्ट्रीय समरसता और सहयोग पर आधारित था। वे भारतीय विदेश नीति के निर्माता माने जाते हैं, जिन्होंने गैर-सहयोग आंदोलन और पंचशील सिद्धांतों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में मदद की। इतिहास में उनकी भूमिकाओं का छिप जानायू थांट और के.एम. पणिक्कर की भूमिकाओं को इतिहास में अक्सर कम आंका गया या नजरअंदाज किया गया।
कुछ कारणों में ठोस राजनीतिक कारण, इतिहास के विभिन्न दृष्टिकोण, और वैश्विक सत्ता संघर्ष शामिल हैं। शीत युद्ध की राजनीति और बड़े देशों के हितों ने छोटे देशों के नेताओं की उपलब्धियों को छिपा दिया। इसके अलावा, भारतीय और म्यांमार के इतिहास में भी उनके योगदान को व्यापक रूप से प्रचारित नहीं किया गया।
जीवनियों के माध्यम से पुनर्स्थापनादो जीवनियाँ, जो यू थांट और के.एम. पणिक्कर के जीवन और कार्यों पर केंद्रित हैं, इस कमी को पूरा करने का प्रयास करती हैं। ये जीवनी न केवल उनके व्यक्तित्व और उपलब्धियों को उजागर करती हैं, बल्कि उनके विचारों और सिद्धांतों को भी विस्तार से प्रस्तुत करती हैं, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान को समझ सके।
ये पुस्तकें अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, शांति स्थापना और कूटनीति के महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालती हैं, और प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।निष्कर्षयू थांट और के.एम. पणिक्कर दोनों ही ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय शांति और सहयोग के लिए अपना जीवन समर्पित किया। भले ही उनके रास्ते कभी सीधे नहीं मिले, लेकिन उनकी सोच और कार्य एक ही धारा के दो महत्वपूर्ण स्रोत थे। इतिहास में उनकी भूमिकाओं को पुनः स्थापित करना न केवल उनके प्रति सम्मान है, बल्कि आज के वैश्विक संदर्भ में भी शांति और सहयोग के महत्व को समझने का एक जरिया है। उनकी जीवनियाँ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो हमें उनके विचारों और कार्यों से परिचित कराती हैं।
