
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने हाल ही में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की चुनौतियों को साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने वकालत की शुरुआत की, तब पूरी तरह से अनिश्चितता का माहौल था। एक परिवार के पहले पीढ़ी के वकील होने के नाते, उन्हें मार्गदर्शन के लिए किसी का सहारा नहीं था।
यह बयान केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो बिना किसी पूर्व मार्गदर्शन के अपने सपनों को साकार करने का संघर्ष कर रहे हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने यह स्पष्ट किया कि वकील बनने का सफर आसान नहीं था। एक नए पेशे में कदम रखते हुए, जहां अनुभवहीनता और ज्ञान की कमी एक बड़ी चुनौती होती है, उन्होंने धैर्य, समर्पण और लगातार प्रयास के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि इस जटिल और अनिश्चित समय में आत्मविश्वास बनाए रखना और अपने लक्ष्यों के प्रति दृढ़ रहना सबसे महत्वपूर्ण था।उनका यह अनुभव यह दर्शाता है कि पेशेवर सफलता केवल पारिवारिक या सामाजिक समर्थन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि व्यक्तिगत इच्छाशक्ति, मेहनत और आत्म-निर्भरता भी उतनी ही
महत्वपूर्ण होती है। सीजेआई सूर्यकांत की कहानी युवा वकीलों और अन्य पेशेवरों के लिए एक मिसाल है कि कैसे कठिनाइयों को पार कर अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।इस सशक्त बयान से यह भी पता चलता है कि न्याय व्यवस्था में भी ऐसे कई व्यक्तित्व हैं जिन्होंने अपनी प्रारंभिक चुनौतियों को पार किया और देश की सर्वोच्च अदालत तक का मार्ग प्रशस्त किया। सीजेआई सूर्यकांत ने यह संदेश दिया है कि अगर हम सही दिशा में प्रयास करें, तो कोई भी बाधा हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचने से रोक नहीं सकती।अंत में, सीजेआई सूर्यकांत का यह अनुभव और विचार हमें यह सिखाता है कि अनिश्चितता के दौर में भी उम्मीद और लगातार प्रयास से सफलता संभव है। यह कहानी न केवल वकीलों के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो बिना किसी पूर्व सहायता के अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है

