
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने दोनों कंपनियों के लोन अकाउंट्स को औपचारिक रूप से ‘फ्रॉड’ कैटेगरी में डाल दिया है. बैंक ने यह फैसला विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट और कंपनी को भेजे गए शो कॉज नोटिसों के बाद लिया. बैंक ने आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये के बैंक लोन का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया, और कई लेनदेन संदिग्ध पाए गए.
आइए आपको विस्तार से मामला बताते है…
रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) और उसकी सब्सिडियरी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) एक बार फिर सुर्खियों में हैं.यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने दोनों कंपनियों के लोन अकाउंट्स को ‘फ्रॉड’ घोषित कर दिया है. यह कार्रवाई कई स्तर की जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और कंपनी को किए गए नोटिस के बाद हुई है.
बैंक की ओर से जारी पत्र के अनुसार, यह फैसला RBI की Master Directions on Fraud 2024 के तहत लिया गया है.
₹1,550 करोड़ की लोन सुविधा, ₹1,324.86 करोड़ बकाया-फाइल के अनुसार, RCOM ने 2013 में यूनियन बैंक से कुल ₹1,550 करोड़ की विभिन्न क्रेडिट सुविधाएं ली थीं, जिनमें से ₹1,324.86 करोड़ 2017 में NPA घोषित हो गया था.
बैंक का दावा है कि कंपनी ने लोन की शर्तों का पालन नहीं किया, जिसके बाद खाता खराब श्रेणी में चला गया.
फॉरेंसिक ऑडिट में खुलासा:
लोन का गलत इस्तेमाल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कराए गए फॉरेंसिक ऑडिट (BOD India LLP द्वारा) में कई गंभीर बातें सामने आईं-बैंक से मिले कुल ₹31,580 करोड़ में से लगभग 44% रकम पुराने कर्ज चुकाने और 41% रकम समूह की संबद्ध कंपनियों को भेजी गई.लगभग ₹6,265 करोड़ लोन रकम सीधे संबंधित कंपनियों को ट्रांसफर की गई. कई निवेश किए गए और तुरंत भुना लिए गए, जिससे शक गहरा गया कि रकम का असल उपयोग बैंकिंग शर्तों के बाहर हुआ.
Inter-company transactions ने बढ़ाया शक–
जांच में सामने आया कि RCOM, RTL और RITL के बीच लोन फंड लगातार इधर-उधर घूमते रहे.RTL ने बैंक से मिली रकम में से ₹1,783 करोड़ RCOM को भेजे.बड़े पैमाने पर ICDs (Inter Corporate Deposits) का उपयोग कर फंड्स को रूट किया गया.कुल ₹41,863 करोड़ ICDs का लेनदेन मिला, जिनमें से बड़ा हिस्सा संबंधित पार्टियों को भुगतान में गया
Netizen नाम की कंपनी के ट्रांजैक्शन पर भी सवाल-ऑडिट में पाया गया कि RCOM से जुड़ी Netizen को ₹5,525 करोड़ की अग्रिम राशि दी गई थी, जिसके बदले मिली संपत्ति की वैल्यू संदिग्ध निकली. बैंक की नजर में यह भी संभावित siphoning का संकेत है.
Show Cause भेजा गया, जवाब नहीं आया-
यूनियन बैंक ने 28 अक्टूबर और 12 नवंबर 2025 को Show Cause Notice भेजा. नोटिस स्पीड पोस्ट और ईमेल से पहुँच गया, लेकिन कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला.फिर बैंक के Fraud Monitoring Group ने 3 दिसंबर 2025 को बैठक में लोन अकाउंट्स को फ्रॉड घोषित करने का फैसला मंजूर कर दिया.
CIRP में होने के कारण NCLT की मंजूरी के बाद राहत की संभावना-
RCOM और RTL दोनों Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) में हैं. CIRP के दौरान Sec 14 और 32A के तहत कुछ अस्थायी सुरक्षा मिलती है. लेकिन बैंकिंग रिकॉर्ड में अब दोनों कंपनियों के खाते आधिकारिक तौर पर ‘फ्रॉड’ दर्ज हो गए हैं.
यह RCOM के रेजॉल्यूशन प्रोसेस और देनदारियों के समाधान पर बड़ा असर डाल सकता है.
